व्योम वार्ता में आप का स्वागत है. व्योम वार्ता आपके मन में उमड़ घुमड़ रहे विचारो का खुला आँगन है, जहा आपके सकारात्मक विचारो का स्वागत है. हमारे मन में प्रायः देश और समाज के लिए, व्यक्ति और प्रकृति के लिए कुछ उलझन कुछ तड़प कुछ करने की कशिस होती है और उन्हें हम विचारो का रूप तो दे देते है पर उन्हें आजकल की बाजारू ख़बरों की दुनिया में स्थान नहीं दिला पाते , आपके ऐसे विचारो को व्योम वार्ता आमंत्रित करता है. अपने विचार हमें इस पते पर मेल करें: vyomvarta@gmail.com
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Wednesday, 8 February 2012
Sunday, 29 January 2012
बनारसी मस्ती के बनारस वाले
एक आदमी सड़क पर बेहोश हो गया. उसके इर्द-गिर्द भीड़ जमा हो गई. हर कोई उसे होश में लाने के लिए सलाहें देने लगा.
“बेचारे को थोड़ी ब्रांडी दो.” एक बुढिया बोली.
“इसके मुंह पर पानी के छींटे मारो.” कोई बोला.
“इसे ब्रांडी दो.” बुढिया ने दोहराया.
“इसे पंखा झलो.” कोई बोला.
“इसे ब्रांडी दो.” बुढिया फिर बोली.
“इसे अस्पताल ले जाओ.” किसी ने कहा.
“इसे ब्रांडी दो.”
“इसे … ”
तभी बेहोश पड़ा आदमी उठकर बैठ गया और जोर से चिल्लाया – “आप सब लोग अपनी बकवास बंद कीजिये और उस बेचारी बुढिया की बात सुनिए.”
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